सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियाँ एवं कार्यक्षेत्र सर्वोच्च न्यायालय को व्यापक शक्तियाँ प्रदान की गई हैं। • प्रारम्भिक क्षेत्राधिकार संविधान के द्वारा कुछ विषय ऐसे निर्धारित किए गए
हैं, जिन पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जाती है। (i) मूल अधिकारों के हनन के सम्बन्ध में नागरिकों द्वारा सीधे सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है।
(ii) भारत सरकार एवं राज्य सरकार या सरकारों के बीच के विवाद। (iii) राज्य सरकार एवं राज्य सरकार के बीच के विवाद। अपीलीय क्षेत्राधिकार इसके अन्तर्गत
सर्वोच्च न्यायालय निम्न तरह की अपीलें
सुनता है (i) दीवानी अपील उच्चतम न्यायालय में
सर्वोच्च न्यायालय की
शक्तियाँ एवं कार्यक्षेत्र प्रारम्भिक क्षेत्राधिकार
उन सभी दीवानी मामलों की अपील की जा सकती है, जिनके सम्बन्ध की अपील की जा सकती है, जिनके सम्बन्ध में उच्च न्यायालय यह प्रमाणित कर दें कि इनमें कोई महत्त्वपूर्ण विधि का प्रश्न निहित है एवं जिसका निर्णय उच्चतम न्यायालय द्वारा होना चाहिए। अपीलीय क्षेत्राधिकार अभिलेख न्यायालय
सलाहकारी क्षेत्राधिकार
न्यायिक समीक्षा का अधिकार अन्य शक्तियाँ
(ii) संवैधानिक अपील संविधान के अनुच्छेद 132 के अनुसार, यदि कोई उच्च न्यायालय किसी मुकदमे के सम्बन्ध में यह प्रमाण पत्र दे दे कि उसमें संविधान के किसी अनुच्छेद की व्याख्या का प्रश्न निहित है तो वह मुकदमा अपील के लिए उच्चतम न्यायालय में जा सकता है।
(iii) फौजदारी मामलों की अपीलें निम्न तीन स्थितियों में अपील सम्भव है अधीनस्थ न्यायालय द्वारा अपराध मुक्त व्यक्ति को उच्च न्यायालय अपील में
मृत्युदण्ड की सजा दे दे। उच्च न्यायालय अधीनस्थ न्यायालय में चल रहे किसी मुकदमें को अपने पास मँगाकर अपराधी को मृत्युदण्ड दे दें।
• उच्च न्यायालय यह घोषित कर दे कि वह मुकदमा उच्चतम न्यायालय में ले
जाने योग्य है।
• सलाहकारी क्षेत्राधिकार उच्चतम न्यायालय विभिन्न संवैधानिक एवं विधिक मामलों पर परामर्श देने का कार्य करता है। संविधान के अनुच्छेद 143 के अनुसार राष्ट्रपति किसी संवैधानिक प्रश्न या सार्वजनिक मामलों पर उच्चतम न्यायालय से परामर्श ले सकता है, किन्तु उसके परामर्श या मन्त्रणा को मानने के लिए राष्ट्रपति बाध्य नहीं होगा।
अभिलेख न्यायालय उच्चतम न्यायालय को अभिलेख न्यायालय कहा जाता है, जिसका तात्पर्य है उच्चतम न्यायालय जो भी निर्णय देता है, उसका अन्य न्यायालयों में नजीर (केस लॉ) के रूप में प्रयोग स्वीकृत होगा तथा कोई भी न्यायालय उनकी प्रामाणिकता पर प्रश्नचिह्न नहीं लगाएगा।
न्यायिक समीक्षा का अधिकार सर्वोच्च न्यायालय को न्यायिक समीक्षा की शक्ति प्राप्त है। इसके अन्तर्गत वो केन्द्र व राज्य दोनों स्तरों पर विधायी व कार्यकारी आदेशों की संवैधानिकता की जाँच कर सकता है। असंवैधानिक होने पर वह इस कानून को शून्य घोषित कर सकता है।
अन्य शक्तियाँ सर्वोच्च न्यायालय में अन्य शक्तियाँ निम्नलिखित हैं (i) सर्वोच्च न्यायालय राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव के सम्बन्ध में किसी
भी प्रकार के विवाद का निदान करता है। (ii) यह राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त पदों पर आसीन व्यक्तियों के व्यवहार एवं आचरण की जाँच कर सकता है।
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