: कर्नाटक के तृतीय युद्ध का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

कर्नाटक के तृतीय युद्ध का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

. कर्नाटक के तृतीय युद्ध का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। उत्तर 1756 ई. में यूरोप में सप्तवर्षीय युद्ध प्रारम्भ हो गया, जिससे और फ्रांसीसी एक-दूसरे के विरोध में आ गए तथा 1757 ई. में एक-दूसरे के स्थानों पर आक्रमण करना शुरू कर दिया। फ्रांसीसियों ने कर्नाटक के अधिकांश पुन: अंग्रेज भागों पर अधिकार कर लिया था। कर्नाटक के तृतीय युद्ध का वास्तविक आरम्भ 1758 ई. में तब हुआ, जब फ्रांसीसी सरकार ने काउण्ट डी लाली को भारत के सम्पूर्ण फ्रांसीसी प्रदेशों के सैनिक एवं असैनिक अधिकारों से युक्त अधिकारी नियुक्त किया। लाली ने 1758 ई. में फोर्ट सेण्ट डेविड जीत लिया। यह युद्ध 1763 ई. तक चला। 1763 ई. में पेरिस की सन्धि के साथ ही इस युद्ध का अन्त हो गया। इस युद्ध के परिणामस्वरूप पाण्डिचेरी, माही और चन्द्रनगर के बन्दरगाह फ्रांस को के वापस कर दिए गए। फ्रांसीसी कम्पनी अब केवल व्यापार करने वाली कम्पनी रह गई। हैदराबाद के निजाम और कर्नाटक का नवाब अंग्रेजों के प्रभाव में आ गए तथा सम्पूर्ण दक्षिण भारत में अंग्रेजों का प्रभुत्व स्थापित हो गया।

प्रश्न 2. पेरिस की सन्धि कब और किनके मध्य की गई? इस सन्धि का फ्रांस पर क्या प्रभाव पड़ा?

(2016)

उत्तर

पेरिस की सन्धि

पेरिस की सन्धि 1763 ई. में अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के मध्य की गई थी। पेरिस की सन्धि पर हस्ताक्षर होते ही 1763 ई. में सप्तवर्षीय युद्ध समाप्त हो गया। इस सन्धि के द्वारा फ्रांसीसियों को भारत स्थित उनके सम्पूर्ण कारखाने वापस कर दिए गए, लेकिन अब उनकी न तो किलेबन्दी की जा सकती थी और न ही सैनिक वहाँ डेरे डाल सकते थे। फ्रांसीसी अब सिर्फ व्यापारी का कार्य कर सकते थे।

फ्रांस पर प्रभाव

तृतीय कर्नाटक युद्ध निर्णायक साबित हुआ। युद्ध में पराजय के फलस्वरूप भारत में फ्रांसीसी साम्राज्य की स्थापना के सारे अवसर नष्ट हो गए। अतः अब वे केवल एक व्यापारी रह गए थे।

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