: मुस्लिम सुधार आन्दोलन

मुस्लिम सुधार आन्दोलन

मुस्लिम सुधार आन्दोलन

मुस्लिम सुधार के आन्दोलन निम्नलिखित थे • सर सैयद अहमद खाँ एवं अलीगढ़ आन्दोलन अंग्रेजी शिक्षा एवं ब्रिटिश सरकार के साथ सहयोग के पक्ष में सबसे प्रभावशाली आन्दोलन का प्रारम्भ सैयद अहमद खाँ के द्वारा किया गया। इनका जन्म 1817 ई. में दिल्ली में हुआ था। इनके द्वारा तहजीब-उल-अखलाक (सभ्यता और नैतिकता) नामक फारसी पत्रिका निकाली गई। इन्होंने 1864 ई. में कलकत्ता में साइण्टिफिक सोसायटी की स्थापना की। 1869 ई. में सर सैयद अहमद खाँ इंग्लैण्ड गए, जिससे उन्हें स्वयं पश्चिमी संस्कृति के सम्पर्क में आने का अवसर मिला, इनके द्वारा मुस्लिमों में नवजागरण के निम्नलिखित प्रयास किए गए

(i) इन्होंने मुस्लिम समाज के आधुनिकीकरण के लिए अंग्रेजी शिक्षा पर बल दिया। इसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए 1875 ई. में अलीगढ़ में मुस्लिम एंग्लो ओरियण्टल स्कूल की स्थापना की। यह 1878 ई. में कॉलेज बन गया और वर्ष 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में परिवर्तित हो गया। (ii) इनके द्वारा मुस्लिम समाज में फैली कुरीतियों, रूढ़ियों और धार्मिक अन्धविश्वासों का खुलकर विरोध किया गया।

(iii) इस्लाम को मानवतावादी रूप देने का प्रयास किया गया।

(iv) इन्होंने स्त्रियों में पर्दा प्रथा का विरोध किया तथा स्त्री शिक्षा का समर्थन किया। अहमदिया आन्दोलन इस आन्दोलन की शुरूआत पंजाब के गुरदासपुर जिले के निवासी मिर्जा गुलाम अहमद के द्वारा 1889 ई. में की गई थी। इन पर पाश्चात्य विचारधारा, थियोसॉफिकल सोसायटी और हिन्दुओं के सुधार आन्दोलन का पर्याप्त प्रभाव पड़ा। यह आन्दोलन उदारवादी सिद्धान्तों पर आधारित देवबन्द आन्दोलन था। ये गैर-मुस्लिमों से घृणा और जेहाद के विरोधी थे। ये पर्दा-प्रथा, बहु-विवाह तथा तलाक के समर्थक थे, इन्होंने अपनी पुस्तक बहरीन-ए- अहमदिया में इस

मुस्लिम सुधार आन्दोलन

सर सैयद अहमद खाँ अलीगढ़ आन्दोलन

अहमदिया आन्दोलन वहाबी आन्दोलन

आन्दोलन के सिद्धान्तों की व्याख्या की है, इनके समर्थकों को 'नबी' के नाम से

जाना जाता था।

• वहाबी आन्दोलन इस आन्दोलन का प्रारम्भ 18वीं शताब्दी में अरब में मुहम्मद अब्दुल वहाब के द्वारा प्रारम्भ किया गया था। भारत में इस आन्दोलन के जन्मदाता सैयद अहमद बरेलवी (1787-1837 ई.) थे। इनके द्वारा कुरान को आम जन भाषा को सरलता से समझने के लिए उर्दू में अनुवादित करवाया गया। वहाबी आन्दोलन का प्रमुख उद्देश्य मुस्लिम जगत् में चेतना एवं धर्म-सुधार को संगठित करना था। इनके द्वारा पाश्चात्य सभ्यता का विरोध किया गया। मुख्यत: इस आन्दोलन के दो प्रमुख उद्देश्य-अपने धर्म का प्रचार एवं मुस्लिम समाज में करना था। सुधार

देवबन्द आन्दोलन मुसलमान उलेमाओं ने जो प्राचीन मुस्लिम विद्या के अग्रणी थे, देवबन्द आन्दोलन चलाया। यह एक पुनरुद्धार आन्दोलन था, जिसके दो प्रमुख

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