: राज्यपाल की शक्तियाँ एवं अधिकार

राज्यपाल की शक्तियाँ एवं अधिकार

राज्यपाल की शक्तियाँ एवं अधिकार

संविधान में प्रदत्त राज्यपाल के शक्तियों व अधिकारों को निम्न भागों में विभाजित किया जाता है।

विधायी शक्ति राज्यपाल पास विधानमण्डल के अधिवेशन को बुलाने, स्थगित करने तथा अवधि से पूर्व विधानसभा को भंग करने का अधिकार है। विधानमण्डल द्वारा पारित विधेयक राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद ही कानून बन पाता है।

राज्यपाल शक्तियाँ/

अधिकार

विधायी शक्ति

कार्यपालिका की शक्ति वित्तीय अधिकार

न्यायिक अधिकार

• अन्य अधिकार

राज्यपाल कुछ विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रख सकता है, जब विधानमण्डल का अधिवेशन न चल रहा हो, तो राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकता है, जो विधानमण्डल की बैठक आरम्भ होने के 6 सप्ताह तक ही लागू रह सकता है। राज्यपाल सम्बन्धित राज्य विधानपरिषद् के 1/6 सदस्यों को मनोनीत करता है। वह विधानसभा में भी एक आंग्ल भारतीय समुदाय के सदस् को मनोनीत कर सकता है। राज्यपाल के पास विधानमण्डल के एक सदन या दोनों सदनों को संयुक्त रूप से सम्बोधित करने का अधिकार है।

कार्यपालिका की शक्ति राज्य कार्यपालिका का प्रधान राज्यपाल ही होता है। राज्य के शासन सम्बन्धित कार्य राज्यपाल के नाम से किए जाते हैं। मुख्यमन्त्री तथा मुख्यमन्त्री के परामर्श पर अन्य मन्त्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा ही होती है। वह राज्य के शासन से सम्बन्धित कोई भी सूचना मुख्यमन्त्री से माँग सकता है। यदि राज्य प्रशासन संविधान के अनुसार न चल रहा हो, तो राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजकर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश भी कर सकता है।

वित्तीय अधिकार राज्यपाल की पूर्व स्वीकृति के बिना कोई भी वित्त विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। राज्यपाल सरकारी खर्च के लिए आकस्मिक निधि से धन देने की सिफारिश कर सकता है।

न्यायिक अधिकार राज्यपाल के परामर्श से ही राष्ट्रपति उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है। जिला न्यायालय तथा अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति, उच्च न्यायालय के परामर्श के बाद, राज्यपाल के द्वारा की जाती है। राज्य सूची से सम्बन्धित कानून के उल्लंघन पर सजा प्राप्त व्यक्ति की सजा को कम करने या माफ करने का अधिकार राज्यपाल को होता है। मृत्यु दण्ड को माफ करने का अधिकार राज्यपाल को नहीं है। यह अधिकार केवल राष्ट्रपति को प्राप्त है। राज्यपाल राज्य न्यायिक आयोग से जुड़े लोगों की नियुक्ति, राज्य उच्च न्यायालय तथा राज्य लोक सेवा आयोग से विचार-विमर्श करके करता है।

• अन्य अधिकार राष्ट्रपति शासन के समय राज्यपाल ही शासन का संचालन करता है। स्पष्ट बहुमत न होने पर स्वविवेक से सक्षम व्यक्ति को मुख्यमन्त्री नियुक्त कर सकता है। राज्य का संवैधानिक प्रधान होने के साथ-साथ केन्द्र का भी प्रतिनिधित्व कर सकता है। इस तरह राज्यपाल को संविधान द्वारा प्रदत्त विशेषाधिकारों के अतिरिक्त कुछ विवेकाधिकार भी प्राप्त हैं।

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