: राज्य शासन में राज्यपाल का क्या महत्त्व है?

राज्य शासन में राज्यपाल का क्या महत्त्व है?

राज्य शासन में राज्यपाल का क्या महत्त्व है? 

राज्यपाल

उत्तर

संविधान के अनुच्छेद 153 में राज्यों के राज्यपाल के बारे में प्रावधान है। राज्यपाल उस राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। राज्य की कार्यपालिका की समस्त शक्तियाँ राज्यपाल में निहित होती हैं, राज्य प्रशासन के समस्त कार्य राज्यपाल के नाम से किए जाते हैं, परन्तु राज्यपाल विवेकाधीन शक्तियों को छोड़कर अपना समस्त कार्य राज्यमन्त्रिपरिषद् की सलाह पर करता है। राज्यपाल मन्त्रिपरिषद् द्वारा किसी विषय से सम्बन्धित किसी विषय को राष्ट्रपति के विचार हेतु आरक्षित कर सकता है।

राज्यपाल वैसे तो मन्त्रिपरिषद् की सलाह पर कार्य करता है, परन्तु निम्नलिखित परिस्थितियों में राज्यपाल स्वविवेक का प्रयोग कर सकता है।

1. विधानसभा में किसी दल को बहुमत प्राप्त न हो, तो राज्यपाल उस दशा में मुख्यमन्त्री की नियुक्ति कर सकता है।

2. मुख्यमन्त्री द्वारा विधानसभा के विघटन के परामर्श के सम्बन्ध में निर्णय कर सकता है।

3. राष्ट्रपति को राज्य की संवैधानिक स्थिति की जानकारी दे सकता है। राज्यपाल के बारे में डॉ. पी के सेन ने कहा है कि “राज्यपाल केवल नाममात्र का अध्यक्ष ही नहीं है, वरन् वह महत्त्वपूर्ण व्यक्ति है, जिसका कार्य यह देखना है कि राज्य का प्रशासन ठीक प्रकार से चल रहा है अथवा नहीं।'

एम वी पायली के अनुसार, “राज्यपाल केवल नाममात्र का अध्यक्ष नहीं है। वह एक ऐसा अधिकारी है, जो राज्य के शासन में महत्त्वपूर्ण रूप से भाग ले

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