: भारत विभाजन की परिस्थितिया

भारत विभाजन की परिस्थितिया



भारत विभाजन की परिस्थितिया

भारत विभाजन की परिस्थितियों का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत किया जा

सकता है

फूट डालो राज करो की नीति

ब्रिटिश शासकों ने भारत में फूट डालो राज करो की नीति का अनुसरण किया। इस नीति का अनुसरण करते हुए उन्होंने हिन्दू और मुसलमानों के बीच मतभेद पैदा कर दिया। उनकी कुछ नीतियाँ मुसलमानों के प्रति भेदभावपूर्ण थीं, तो कुछ नीतियाँ हिन्दुओं के प्रति ।

भारत विभाजन की परिस्थि

का वर्णन

फूट डालो राज करो की नीति

मुस्लिम लीग को प्रोत्साहन

जिन्ना की माँग

साम्प्रदायिक हिंसा

हिन्दू महासभा का प्रभाव • माउण्टबेटन का प्रभाव

मुस्लिम लीग को प्रोत्साहन कांग्रेस ने अपनी स्थापना के बाद से ही अंग्रेजों की नीतियों का विरोध करना कर दिया था, इसलिए अंग्रेज कांग्रेस को पसन्द नहीं करते थे। कांग्रेस के वि मुस्लिम लीग को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से अंग्रेजों ने 1909 ई. में मुसलमानों साम्प्रदायिक प्रतिनिधित्व का अधिकार दिया। इस तरह से वह मुस्लिम लीग भड़काकर कांग्रेस पर नियन्त्रण करना चाहते थे।

जिन्ना की माँग

मुस्लिम लीग के शीर्ष नेता मोहम्मद अली जिन्ना अपनी महत्त्वाकांक्षा के चलते दो रा के गठन तथा भारत के विभाजन के समर्थक बन गए थे। उन्होंने अपनी इस महत्त्वाकां के चलते राष्ट्रीय आन्दोलन में गतिरोध बनाए रखा तथा सुधारों में हमेशा अड़चनें की तथा पाकिस्तान की माँग पूरी होती न देख देश को साम्प्रदायिक हिंसा की आग

झोंक दिया और अन्ततः पाकिस्तान लेकर ही मानें।

साम्प्रदायिक हिंसा

जिन्ना की प्रत्यक्ष कार्यवाही की नीति के कारण भारत में प्रत्येक जगह साम्प्रदायि हिंसा होने लगी। इन साम्प्रदायिक हिंसा में आम जनता को अपनी जान गवानी रही थी, वहीं अपार धन-सम्पत्ति भी नष्ट हो रही थी। साम्प्रदायिक हिंसा को रो के लिए कांग्रेस ने भारत का विभाजन स्वीकार कर लिया।

हिन्दू महासभा का प्रभाव

1930 ई. के पूर्व तक हिन्दू महासभा ने प्रत्येक तरह से कांग्रेस की नीतियों समर्थन किया, लेकिन 1930 ई. के बाद हिन्दू महासभा में प्रतिक्रियावादी व्यक्ति का प्रभुत्व स्थापित हो गया। महासभा के एक अधिवेशन में वीर सावरकर ने अप भविष्य की नीतियों को उजागर करते हुए कहा कि “भारत दो राष्ट्र है, हिन्दू अ मुसलमान, भविष्य में हमारी राजनीति विशुद्ध हिन्दू राजनीति होगी।" इस तरह हिन्दू महासभा ने भी देश के विभाजन के लिए कांग्रेस को प्रेरित किया।

माउण्टबेटन का प्रभाव

माउण्टबेटन के व्यक्तित्व का प्रभाव भी भारत विभाजन में सहायक सिद्ध हुआ। ज माउण्टबेटन के प्रभाव ने नेहरूजी को पाकिस्तान का विरोध करने से तटस्थ व दिया, वहीं अधिकांश कांग्रेसी नेता भारत विभाजन पर सहमत हो गए।

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