: राजा राममोहन राय

राजा राममोहन राय

उत्तर राजा राममोहन राय बंगाल मे प्रारम्भ हुए सामाजिक सुघार आन्दोलन का नेतृत्व राजा रामन हन राज थे किया, इसलिए इन्हे नवजागरण का अग्रदूत, सुघार आल्ड्रोलनों का प्रकाझ आधुनिक भारत का पिता एवं नवप्रभाव का तारा कहा जाता है। राजा राममंहर राय का जन्म 22 मई, 1774 को बंगाल के हुगलो विले में एक ब्राह्मण परिकर में हुआ था। ये बचपन से ही तेज बुद्धि एवं विद्रोही स्वमाव के थे। इन्होंने 15 वह को अवस्था में एक लेख के माध्यम से मूर्तिपूजा का विगेघध किया। ये अनक भाषाओं के विद्वान्‌ थे तथा इन्होंने अपना साय जीवन समाज में फैली बुगाइओ को दूर करने में लगा दिया। भारतीय समाज एवं धर्म में फैली कुरीतियों को दूर करने के उद्देश्य से राजा राममोहन राय ने 20 अगस्त, 1828 को ब्रह्म सभा के नाम बने एक नए समाज की स्थापना की, जिसे बाद में ब्रह्म समाज कहा गया। शीत्र हो यह राष्ट्रीय संस्था बन गई, इस संस्था के माध्यम से देश में नवजागरण का कार्य प्रारम्भ किया गया। ब्रह्म समाज के सिद्धान्त ब्रह्म समाज के मिद्धान्त निम्नलिखित थे « ईश्वर एक है तथा वह सर्वगुणमम्पन्न है। « ईश्वर कभी अवतार नहीं लेता, वह निगकार है तथा दयानु है। « मूर्तियूजा तथा मन्दिर को स्थापना निरर्थक है। « ईश्वर की पूजा आध्यात्मिक ढंग से भविन द्वारा को जानो है और वह सब प्रार्थना सुनता है। * याप-कर्म विनाश का कारण है। अत: पाप न करें अथवा उसका प्रायश्चित करें। ईश्वर पापियों व युण्वात्याओ को उनके कर्मानुसार फल देता है। « सभी जातियों, वर्णों को ईश्वर की आगघना का समान अधिकार है। « ईश्वर के प्रति पितृभावना तथा मनुष्य जाति के प्रति भाईचारे को भावना रखते चाहिए। हु * सभी धर्मों के उपदेश सत्य हैं, उनसे शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए।॥ राजा राममोहन राय,/ब्रह्म समाज द्वारा किए गए प्रमुख कार्य * सामाजिक कुप्रथाओं का अन्त इनके समय सनी प्रथा एक ज्वलन्त समस्‍्क थी। इसके विरोध के लिए इन्होंने अपनी पत्रिका संवाद कौमुदी का उपये1 किया

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