: महात्मा गाँधी

महात्मा गाँधी

महात्मा गाँधी * भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के इतिहास में 1919-1947 ई. तक के काल को गाँधी युग के नाम से जाना जाता है। । * महात्मा गाँधी अर्थात्‌ मोहनदास करमचन्द गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर,1869 को गुजरात प्रान्त के पोरबन्दर नामक स्थान पर हुआ था। इनके पिता का नाम करमचन्द और माता का नाम पुतलीबाई था। 1891 ई. में महात्मा गॉधी इंग्लैण्ड से वकालत की उपाधि प्राप्त कर भारत आए। * दक्षिण अफ्रीका में गाँधीजी के आन्दोलन के कारण दक्षिण अफ्रीकी सरकार द्वारा 1914 ई. में अधिकांश काले कानूनों को समाप्त कर दिया गया। * 1915 ई. में महात्मा गाँधी अफ्रीका से भारत लौटे और यहाँ इनका सम्पर्क गोषाल कृष्ण गोखले से हुआ, जिन्हें गॉँधीजी ने अपना राजनीतिक गुरु बनाया। « 1916 ई. में इन्होंने अहमदाबाद (युजरात) में साबरमती आश्रम की स्थापना की। « 1918 ई. में गाँधीजी सूती कपड़ा कारखानों के मजदूरों के बीच सत्याग्रह आन्दोलन चलाने अहमदाबाद गए। असहयोग आन्दोलन ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों के विरोध में तथा भारत में स्वराज्य की स्थापना के उद्देश्य से असहयोग आन्दोलन के कार्यक्रम पर विचार किया गया। इसके लिए कलकत्ता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विशेष अधिवेशन में गाँधीजी ने असहयोग आन्दोलन का प्रस्ताव 'रखा। असहयोग आन्दोलन के कारण असहयोग आन्दोलन के निम्नलिखित कारण थे « प्रथम विश्वयुद्ध के बाद आर्थिक कठिनाइयों के कारण महँँगाई बहुत बढ गई। मध्यम वर्ग एवं निम्न वर्ग इस महँगाई से अत्यधिक परेशान हो गए थे। इन परिस्थितियों ने भारतीयों में ब्रिटिश विरोधी भावनाओं का प्रसार कर उन्हें आन्दोलन हेतु प्रोत्साहित किया। « रौलेट एक्ट तथा जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड जैसी घटनाओं ने विदेशी शासकों के क्रूर एवं असभ्य व्यवहार को उजागर कर दिया। * पंजाब में अत्याचारों के सम्बन्ध में हैंगर की सिफारिशों ने सबकी आँखें खोल दीं। « 1919 ई. के मॉण्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार भी द्वैध शासन लागू करने की नीयत से लाया गया न कि आम जनता को राहत पहुँचाने के उद्देश्य से। स्वशासन की माँग कर रहे राष्ट्रवादियों को भी इससे घोर निराशा हुई। * सरकार के द्वारा किसी भी क्षेत्र में सहयोग न करना भी एक प्रमुख कारण था। * प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने बड़ी संख्या में भारतीयों को सेना में शामिल किया था। युद्ध समाप्त होने के बाद ब्रिटिश सरकार ने इन सैनिको की छँटनी शुरू कर दी। इससे बड़ी संख्या में भारतीय सैनिक बेरोजगार हो गए। * जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड की जाँच के लिए 19 अक्टूबर, 1919 को हण्टर कमेटी का गठन किया गया। 24 मई, 1920 को हण्टर कमेटी की ओर से जारी रिपोर्ट में जनरल ओ. डायर और अन्य आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया। जनरल ओ,. डायर को निर्णय लेने की भूल कहकर पद से हटा दिया गया, लेकिन इंग्लैण्ड पहुँचने पर उसका भव्य स्वागत किया गया था। इससे भारतीय जनता में असन्तोष की भावना उत्पन्न हो गई थी। असहयोग आन्दोलन के कार्यक्रम असहयोग आन्दोलन के निम्नलिखित कार्यक्रम थे * असैनिक श्रमिक व॒ कर्मचारी वर्ग मेसोपोटामिया में जाकर नौकरी करने से इनकार करें। सरकारी उपाधि एवं अवैतनिक सरकारी पदों का त्याग किया जाए। « ब्रिटिश सरकार द्वारा आयोजित सरकारी तथा अर्द्धू-सरकारी उत्सवो कर्म बहिष्कार किया जाए। * स्थानीय संस्थाओं की सरकारी सदस्यता से त्याग-पत्र दिया जाए। * सरकारी स्कूलों एवं कॉलेजों का बहिष्कार किया जाए। किम नमन पर मम शमी गाँधी * भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के इतिहास में 1919-1947 ई. तक के काल को गाँधी युग के नाम से जाना जाता है। । * महात्मा गाँधी अर्थात्‌ मोहनदास करमचन्द गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर,1869 को गुजरात प्रान्त के पोरबन्दर नामक स्थान पर हुआ था। इनके पिता का नाम करमचन्द और माता का नाम पुतलीबाई था। 1891 ई. में महात्मा गॉधी इंग्लैण्ड से वकालत की उपाधि प्राप्त कर भारत आए। * दक्षिण अफ्रीका में गाँधीजी के आन्दोलन के कारण दक्षिण अफ्रीकी सरकार द्वारा 1914 ई. में अधिकांश काले कानूनों को समाप्त कर दिया गया। * 1915 ई. में महात्मा गाँधी अफ्रीका से भारत लौटे और यहाँ इनका सम्पर्क गोषाल कृष्ण गोखले से हुआ, जिन्हें गॉँधीजी ने अपना राजनीतिक गुरु बनाया। « 1916 ई. में इन्होंने अहमदाबाद (युजरात) में साबरमती आश्रम की स्थापना की। « 1918 ई. में गाँधीजी सूती कपड़ा कारखानों के मजदूरों के बीच सत्याग्रह आन्दोलन चलाने अहमदाबाद गए। असहयोग आन्दोलन ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों के विरोध में तथा भारत में स्वराज्य की स्थापना के उद्देश्य से असहयोग आन्दोलन के कार्यक्रम पर विचार किया गया। इसके लिए कलकत्ता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विशेष अधिवेशन में गाँधीजी ने असहयोग आन्दोलन का प्रस्ताव 'रखा। असहयोग आन्दोलन के कारण असहयोग आन्दोलन के निम्नलिखित कारण थे « प्रथम विश्वयुद्ध के बाद आर्थिक कठिनाइयों के कारण महँँगाई बहुत बढ गई। मध्यम वर्ग एवं निम्न वर्ग इस महँगाई से अत्यधिक परेशान हो गए थे। इन परिस्थितियों ने भारतीयों में ब्रिटिश विरोधी भावनाओं का प्रसार कर उन्हें आन्दोलन हेतु प्रोत्साहित किया। « रौलेट एक्ट तथा जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड जैसी घटनाओं ने विदेशी शासकों के क्रूर एवं असभ्य व्यवहार को उजागर कर दिया। * पंजाब में अत्याचारों के सम्बन्ध में हैंगर की सिफारिशों ने सबकी आँखें खोल दीं। « 1919 ई. के मॉण्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार भी द्वैध शासन लागू करने की नीयत से लाया गया न कि आम जनता को राहत पहुँचाने के उद्देश्य से। स्वशासन की माँग कर रहे राष्ट्रवादियों को भी इससे घोर निराशा हुई। * सरकार के द्वारा किसी भी क्षेत्र में सहयोग न करना भी एक प्रमुख कारण था। * प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने बड़ी संख्या में भारतीयों को सेना में शामिल किया था। युद्ध समाप्त होने के बाद ब्रिटिश सरकार ने इन सैनिको की छँटनी शुरू कर दी। इससे बड़ी संख्या में भारतीय सैनिक बेरोजगार हो गए। * जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड की जाँच के लिए 19 अक्टूबर, 1919 को हण्टर कमेटी का गठन किया गया। 24 मई, 1920 को हण्टर कमेटी की ओर से जारी रिपोर्ट में जनरल ओ. डायर और अन्य आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया। जनरल ओ,. डायर को निर्णय लेने की भूल कहकर पद से हटा दिया गया, लेकिन इंग्लैण्ड पहुँचने पर उसका भव्य स्वागत किया गया था। इससे भारतीय जनता में असन्तोष की भावना उत्पन्न हो गई थी। असहयोग आन्दोलन के कार्यक्रम असहयोग आन्दोलन के निम्नलिखित कार्यक्रम थे * असैनिक श्रमिक व॒ कर्मचारी वर्ग मेसोपोटामिया में जाकर नौकरी करने से इनकार करें। सरकारी उपाधि एवं अवैतनिक सरकारी पदों का त्याग किया जाए। « ब्रिटिश सरकार द्वारा आयोजित सरकारी तथा अर्द्धू-सरकारी उत्सवो कर्म बहिष्कार किया जाए। * स्थानीय संस्थाओं की सरकारी सदस्यता से त्याग-पत्र दिया जाए। * सरकारी स्कूलों एवं कॉलेजों का बहिष्कार किया जाए। किम नमन पर मम शमी

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