: सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आन्दोलन

सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आन्दोलन

सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आन्दोलन उत्तर उन्‍नीसवीं शताब्दी का धार्मिक ओर सामाजिक युनर्जागरण आधुनिक भारतीय इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण घटना है, इसने भारतीयों को आत्म निरीक्षण करने के लिए विवश किया। इस समय हिन्दू धर्म एवं समाज निष्क्रिय एवं शक्तिहीन अवस्था में था। अतः हिन्दू समाज मे सुधार की आवश्यकता थी। इसके लिए िनलिखित सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आन्दोलन चलाए गए, जो इस * प्रकार « ब्रह्म समाज ब्रह्म समाज की स्थापना राजा... गिमाजिक एक भ्रार्सिक राममोहन राय के द्वारा की गई। इस समाज. चैकार आन्दोलन का प्रमुख उद्देश्य एकेश्वरवाद, * ब्रह्म समाज आस्तिकता तथा आचार सम्बन्धी बातो पर * प्रार्थना समाज आधारित था। यह जाति व्यवस्था एवं * आर्य समाज बाल-विवाह के विरोधी, जबकि पुरुष एवं * थियोसॉफिकल सोसायटी » रामकृष्ण मिशन स्त्री शिक्षा के प्रबल समर्थक थे। *» प्रार्थना समाज आत्माराम पाण्डुरंग के द्वारा 1867 ई. में बम्बई में प्रार्था समाज की स्थापना की गई, इनके द्वारा बाल-विवाह, पर्दा-प्रथा, बहु-विवाह एवं जाति-पॉँति का विरोध किया गया तथा स्त्री शिक्षा एवं बिधवा विवाह को प्रोत्साहित किया गया। आर्य समाज स्वामी दयानन्द सरस्वती के द्वारा 1875 ई. में बम्बई में आर्य समाज की स्थापना की गई, इनके द्वारा ब्राह्मणो के प्रभुत्व का विरोध किया गया। जाति-प्रथा, मूर्तिपूजा, धार्मिक कर्मकाण्डों, बाल विवाह, छुआछूत का खुलकर विरोध किया गया। इनके द्वारा शिक्षा के प्रसार के लिए अमेक शिक्षण संस्थाएँ खोली गईं तथा वेदों का प्रचार-प्रसार किया गया। थियोसॉफिकल सोसायटी थियोसॉफिकल सोसायटी की स्थापना भारत में श्रीमती ऐनी बेसेण्ट के द्वारा की गई। इस सोसायटी का मुख्य उद्देश्य प्राचीन हिन्दू धर्म के लोगों के आत्मविश्वास को जगाना और बढ़ाना तथा धर्म को समाज सेवा का मुख्य आधार बनाना था। रामकृष्ण मिशन इस मिशन की स्थापना, स्वामी विवेकानन्द ने की थी। इस संस्था के द्वारा समाज में फैली बुराई; जैसे--छुआछूत, जाति-प्रथा, मूर्तिपूजा, धार्मिक कर्मकाण्डों, अन्धविश्वासो का विरोध किया गया तथा स्वतन्त्रता, समानता एवं मानववाद अपनाने पर बल दिया गया। « मुस्लिम सुधार आन्दोलन सर सैयद अहमद खाँ के द्वारा मुसलमानों में जागृति लाने के लिए धार्मिक तथा सामाजिक क्षेत्र में प्रशंसनीय कार्य किया गया। इनके द्वारा हिन्दू-मुस्लिम एकता, पर्दा प्रथा, बहु विवाह तथा तलाक का विरोध किया गया तथा स्त्री शिक्षा पर बल दिया गया। मुस्लिम सुधार आन्दोलन

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